Marhi Mata Mandir – जाने मंदिर के इतिहास तथा महत्व

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित marhi mata mandir छत्तीसगढ़ की एक महत्वपूर्ण धरोहर है। यह मंदिर स्थानीय लोगो की संस्कृति और आस्था का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए एक आशा और विश्वास का केंद्र है। 

मंदिर में विराजमान मरही माता को क्षेत्र की आदिवासी जनजाति द्वारा कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि मरही माता अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। चैत्र तथा नवरात्रि के समय यहां श्रद्धालुओं का बहुत ज्यादा भीड़ देखि जाती है।

इस आर्टिकल में, हम मरही माता मंदिर के बारे में विस्तार से जानेंगे। हम मंदिर के इतिहास, महत्व, और लोगों पर इसके प्रभाव के बारे में जानेंगे।

Marhi Mata Mandir | मरही माता मंदिर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के भनवारटंक में स्थित marhi mata mandir क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केन्द्र है। यह मंदिर घनघोर जंगल के बीच में स्थित है, जिसका निर्माण सन 1981 में ब्रिटिश शासन में हुई थी। मंदिर में मां मरही की प्रतिमा नीम के पेड़ के नीचे विराजमान है।

मरही माता को क्षेत्र की आदिवासी जनजाति द्वारा कुलदेवी के रूप में बड़ी ही आस्था तथा स्नेह भाव से पूजा जाता है। मान्यता है कि marhi mata अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। चैत्र नवरात्रि और रामनवमी के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी संख्या देखने को मिलती है। यहाँ मरही माता के चमत्कार से नवरात्रि के समय यहां से गुजरने वाली ट्रेनों के पहिए अपने आप रुक जाते हैं।

marhi mata mandir bilaspur

मंदिर परिसर में एक भव्य तालाब है, जिसके किनारे भोजन प्रसाद भंडारे की व्यवस्था है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर ज्योति कलश और बकरे की बलि देते हैं तथा पेड़ के ऊपर नारियल बांधते है. 

मरही माता का इतिहास

मरही माता का इतिहास एक कहानी से जुड़ी हुई है, जब एक मालगाड़ी की 1982-1984 में नर्मदा एक्सप्रेस से दुर्घटना हुई उसके बाद इस मंदिर की प्रसिद्धि बढ़ी। उस समय यहां रहने वाले आदिवासी जनजातियां पेड़ों पर चुनरी और नारियल बांधते थे। दुर्घटना के बाद जब यहां लोगों की भीड़ बढ़ी, तो लोगों ने इन आदिवासियों से पूछा कि आप पेड़ों पर चुनरी और नारियल क्यों बांधते हो। जवाब में वहां रहने वाले आदिवासियों ने कहा कि यह स्थान हमारी आराध्य देवी marhi mata का स्थान है, जिसके कारण हम माँ को स्नेह अर्पण करने के लिए चुनरी तथा नारियल बांधते है। जिसके चलते ही यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना बढ़ गया।

उस दुर्घटना के बाद आज तक मरही माता मार्ग के स्थान पर अभी तक कोई भी दुर्घटना नहीं हुई है। बल्कि बहुत से श्रद्धालु भक्त माता के दर्शन करने के लिए ट्रेन से उतरकर पेड़ पर चुनरी तथा नारियल बांधते हैं. यह स्थान आसपास के सभी गांव के लिए एक आस्था का केंद्र बन गए हैं। 

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मरही माता मंदिर छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आस्था का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए एक आशा और विश्वास का केंद्र है।

मरही माता मंदिर: कब जाना चाहिए?

नवरात्रि के दौरान: मरही माता मंदिर, छत्तीसगढ़ की के स्थानीय लोगो के लिए आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि मरही माता अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। इसलिए, इस मंदिर की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय नवरात्रि के दौरान होता है। नवरात्रि के दौरान मरही माता में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

सप्ताह के दिनों में: नवरात्रि के अलावा, मरही माता मंदिर की यात्रा के लिए अन्य समय भी अच्छे हैं। यदि आप भीड़ से बचना चाहते हैं, तो आप सप्ताह के दिनों में मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।

मानसून के दौरान: इसके अलावा, यदि आप मंदिर के आसपास के क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेना चाहते हैं, तो आप मानसून के दौरान यात्रा कर सकते हैं। इस दौरान, मंदिर के आसपास का जंगल हरियाली से भर जाता है।

बिलासपुर से मरही माता कितने किलोमीटर है?

बिलासपुर से मरही माता 85 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है।

मरही माता कौन है?

मरही माता आदिवासी जनजाति द्वारा कुलदेवी के रूप पूजे जाने वाली देवी है, जो माँ दुर्गा का ही रूप है. इसलिए यह मंदिर माँ दुर्गा को समर्पित है.

मरही माता मंदिर कहां है?

मरही माता मंदिर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के भनवारटंक में स्थित है, जिसे आदिवासी जनजाति द्वारा कुलदेवी के रूप में बड़ी ही आस्था तथा स्नेह भाव से पूजा जाता है।

How to Reach Marhi Mata Mandir | मरही माता मंदिर कैसे पहुंचें

मरही माता मंदिर, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के भनवारटंक में स्थित है तथा marhi mata mandir bilaspur से 85 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है जहाँ आप नीचे दिए गये यात्रा के निम्न साधनों द्वारा बड़ी आसानी से पहुच सकते है. यह मंदिर घने जंगल के बीच में स्थित है, 

सड़क मार्ग: बिलासपुर से भनवारटंक के लिए बस, टैक्सी, और निजी वाहन की सुविधा उपलब्ध है। बिलासपुर से भनवारटंक की दूरी लगभग 86 किलोमीटर है। जिससे की आप बड़ी आसानी से मरही माता मंदिर पहुच सकते है. 

रेल मार्ग: बिलासपुर रेलवे स्टेशन से भनवारटंक के लिए कई ट्रेनें चलती हैं। जिससे की आप बड़ी आसानी से मरही माता मंदिर पहुच सकते है. तथा वहां पहुचने के बाद आप माता मरही देवी के दर्शन कर सकते है.

ऊपर दिए गये दोनों ही साधन marhi mata mandir पहुचने के लिए उपर्युक्त है क्योकि आप इन दिए गये साधनों से छत्तीसगढ़ के किसी भी जिले से यहाँ पहुच सकते है.

cgyatra opinion:

मरही माता मंदिर बिलासपुर जिले में स्थित एक ऐसा स्थान है जो भक्तों के उत्साह को दर्शाता है। नवरात्रि के दौरान तो मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, लोग दूर-दूर से आकर माँ के दर्शन करते है। वे सभी मां मरही से अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करते हैं। इस मंदिर की यात्रा से भक्तों को एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह का अनुभव होता है। इसलिए आपको भी marhi mata mandir जाने के लिए तथा अलग ही ऊर्जा और उत्साह का अनुभव प्राप्त करने का आग्रह करता हु.

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